दो से ज्यादा बच्चे पैदा होने पर सरकारी नौकरी से इनकार करना भेदभाव पूर्ण नहीं

INDIA STRONG NEWS
0

 दो से ज्यादा बच्चे पैदा होने पर सरकारी नौकरी से इनकार।


संवाददाता सुनील कुमार की रिपोर्ट।

राजस्थान की पिछली सरकार के दो बच्चों के नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने मंजरी मोहर लगाते हुए कहा कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी देने से इनकार करना भेदभाव नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए इसी तरह के नियम को अपनी मंजूरी दे दी। इस कानून को मंजूरी देते समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सरकार कर नीति  बनाने के अधिकार क्षेत्र में आता है।


राजस्थान की पिछली सरकार के दो बच्चों के नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मंजूरी की मोहर लगाते हुए कहा है कि दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी देने से इनकार करना, भेदभाव नहीं है। जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस दीपंकर  दत्त और जस्टिस केबी विश्वनाथन, की पीठ ने राजस्थान हाई कोर्ट के 12 अक्टूबर 2022 के फैसले को बरकरार रखते हुए।

अपने फैसले में कहा कि सरकार इस प्रावधान के जरिए परिवार नियोजन को बढ़ावा देने की इच्छा रखती होगी।

इन नियमों में कहा गया है कि कोई भी उम्मीदवार सरकारी सेवा में नियुक्ती के लिए पत्र नहीं होगा। 1 जून 2022 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह निर्विवाद है

। अपील करता ने राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल पद पर भारती के लिए आवेदन किया था। ऐसी भर्ती राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा नियम 1989 के तहत होती है।

तीन जजों की पीठ ने कहा कि ऐसा ही प्रावधान पंचायत चुनाव लड़ने के लिए पात्रता शर्त  के रूप में भी है। उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था तब भी सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि दो से अधिक जीवित बच्चे होने पर उम्मीदवारों को आयोग्य घोषित करने का नियम कतई भेदभाव पूर्ण नहीं है।

साथ ही यह संविधान के दायरे से भी बाहर है। इस प्रावधान का मकसद परिवार नियोजन और छोटा परिवार की भावनाओं को बढ़ावा देना है। लिहाजा पीठ ने अपने 20 फरवरी के पिछले आदेश कि पुष्टि ही की है,,,,,

Tags

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!